ऐसा तो नहीं था …

ऐसा तो नहीं था
कि मुझे पता ना था ।
ऐसा तो नहीं था
कि मुझे अंदाज़ा ना था ।

ऐसा तो नहीं था
कि मैंने सोचा ना था ।
ऐसा तो नहीं था
कि मैंने सुना ना था ।

फिर भी कम्बक्ख्त!
उस पल के लिए
मैं तैयार नहीं था ।
शायद खुद को ठीक से
परखा ना था ,
या खुद को ठीक
से बाँधा नहीं था ।

खैर ! दिन के सूरज ने
रात के अँधेरे से
बचाया कब था ?

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